Rameshwar temple: चिड़ावा की चंदी बाई ने 31 हजार से गंगा किनारे बनवाया था यह मंदिर

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यदि आप रामझूला (ramjhula) पहुंचे हैं तो यहां प्राचीन काल से आभामान रामेश्वर मंदिर (Rameshwar temple) के दर्शन करना न भूलें।

यह प्राचीन मंदिर रामझूला के एग्जिट गेट के नजदीक गंगा किनारे स्थित है। इसकी स्थापना केवल 31 हजार रूपये से हुई थी।

मंदिर के बाहर लगे शिलापट्ट पर इस संबंध में सारी जानकारी उद्धृत की गई है।

आपको जानकारी दे दें कि यह मंदिर बाबा काली कमली वाले स्वर्गाश्रम वालों की आज्ञा से राजस्थान (rajasthan) के जिला शेखावटी (shekhawati) क्षेत्र स्थित चिड़ावा (chidawa) निवासी श्रीमती चंदी बाई भार्या सेठ श्यौमुख राय माता सेठ उमराव सिंह डालमिया ने बनवाया था। इसका स्थापना काल ज्येष्ठ शुक्ला संवत 1977 है।

आपको बता दें कि भगवान शिव (lord Shiva) को समर्पित इस रामेश्वर मंदिर (Rameshwar temple) में श्रद्धालु शिवलिंग पूजने पहुंचते हैं। ़

ऋषिकेश (rishikesh) से होकर स्वर्गाश्रम (swargashram) क्षेत्र में पहुंचने वाले श्रद्धालु अन्य दर्शनीय स्थलों के साथ यहां भी मत्था टेकना नहीं भूलते।

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कोरोना (corona) महामारी के दौरान रामेश्वर मंदिर (Rameshwar temple) में पहुंचने वाले भक्तों की संख्या पर भी बड़ा असर पड़ा था।

आपको बता दें कि लाॅकडाउन (lockdown) के दौरान इस मंदिर में घंटे को सेंसर (sensor) से जोड़ा गया था।

इससे श्रद्धालुओं को घंटा बजाने के लिए उसे स्पर्श (touch) करने की कोई भी आवश्यकता नहीं रह गई थी।

सेंसर लगाने का कार्य एक निजी कंपनी को सौंपा गया था। श्रद्धालु केवल इसके पास हाथ ले जाते थे और यह बज उठता था।

ऐसा कोरोना वायरस का संक्रमण न फैले इसके मद्देनजर किया गया था। पीले रंग से सज्जित इस मंदिर की परिक्रमा करना भी श्रद्धालु नहीं भूलते।

इसके अलावा बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अब केवल लक्ष्मणझूला एवं रामझूला ही आकर्षण का केंद्र नहीं, बल्कि जानकीसेतु (Janki Setu) भी बड़ी संख्या में इन दिनों सैलानी पहुंचते हैं।

इन दिनों युवाओं की सेल्फी में भी यही सेतु छाया हुआ है। इस पुल के बनने से पर्यटकों एवं स्थानीय निवासियों के लिए बीटल्स आश्रम (Beatles ashram) सहित अन्य आस पास के क्षेत्रों तक पहुंचना आसान हो गया है।

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