Amelia Earhart : अटलांटिक महासागर के ऊपर अकेले विमान उड़ाने वाली पहली महिला, जिनकी मौत आज भी रहस्य

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21 मई! ये वो दिन था, जब नौ दशक पहले एमिलिया ईयरहार्ट (Amelia Earhart) अटलांटिक महासागर के ऊपर से अकेले विमान उड़ाने वाली पहली महिला बनीं थीं।

आपको बता दें कि एमिलिया ईयरहार्ट (Amelia Earhart) का जन्‍म 24 जुलाई, 1897 को हुआ था। उनका पूरा नाम एमिलिया मैरी ईयरहार्ट था, जो उनकी दादी और नानी के नाम को मिलाकर बना था।,

उनका दिल उन दिनों उन विषयों में था, जो मर्दों के समझे जाते थे। मसलन-लॉ, मैनेजमेंट, मेकैनिकल इंजीनियरिंग, फिल्म डायरेक्शन आदि। अलबत्ता, फ्लाइंग (flying) इसमें शामिल नहीं था।

बात 1917 की है। एमिलिया ईयरहार्ट (Amelia Earhart) अपनी बहन के पास टोरंटो (Canada) पहुंचीं।

पहला विश्व युद्ध (world war-1) शुरू हो चुका था। मोर्चे पर ज़ख्मी फौजियों का इलाज चल रहा था। इनकी सहायता के लिए एमिलिया  (Amelia Earhart) रेड क्रॉस (red Cross) से ट्रेनिंग लेकर नर्स बन गईं।

उन्होंने पहली बार यहां नजदीक से एक प्लेन उड़ता हुआ देखा। यहां से लौट कर वे कोलंबिया विश्वविद्यालय (Columbia University) में मेडिकल (medical) की पढ़ाई करने लगीं।

इस बीच एमिलिया के माता-पिता, जो कुछ समय से अलग थे, साथ आकर कैलिफोर्निया (California) में बस गए।

एमिलिया ने अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ मां-बाप के साथ रहने का फैसला किया। यहीं 28 दिसंबर, 1920 को एमिलिया 10 डॉलर का टिकट खरीद शौकिया 10 मिनट के लिए एक प्लेन में बैठीं।

यह शायद उनकी जिंदगी का टर्निंग प्वाइंट (turning point) था। इसके बाद उन्होंने प्लेन उड़ाना सीखा। पैसे जोड़कर एक सेकेंड हैंड बाइप्लेन भी खरीद लिया।

उन्होंने इसका नाम कैनेरी रखा। इसी में 22 अक्टूबर, 1922 को उन्होंने आसमान में 14,000 फीट की ऊंचाई तक का सफर तय किया।

बतौर पायलट दुनिया में सबसे ऊंचे उड़ी महिला का यह पहला world record था। लेकिन इस बीच उनके माता-पिता का तलाक हो गया और एमिलिया को फ्लाइंग से दूर होना पड़ा।

इसी बीच एमिलिया की साइनस की दिक्कत बढ़ गई। ऑपरेशन असफल रहा। पैसों की भी कमी हो गई, लिहाजा उन्हें अपना बाइ प्लेन बेचना पड़ा।

अब एमिलिया ईयरहार्ट (Amelia Earhart) अपनी मां को लेकर बोस्टन (Boston) आ गईं। इस बीच उन्होंने टीचिंग और एविएशन पर अखबारों में लेख लिखकर समय काटा।

1928 में उनके समय ने फिर करवट ली। एक फोन कॉल आया। उनसे पूछा गया-क्या वे अटलांटिक पार करने वाली पहली महिला बनना चाहेंगी?

न का सवाल ही नहीं था। उन्होंने पायलट विलमर स्टुल्ट्ज़ के साथ उड़ान भरी। एमिलिया को बस लॉग मेंटेंन करने थे‌। ऐसे में अटलांटिक (Atlantic) पार करने वाली वह पहली महिला पायलट बनीं।

18 जून, 1928 को एमिलिया और विलमर पौने इक्कीस घंटे लगातार प्लेन उड़ा कर अमेरिका से ब्रिटेन पहुचे।

लौटने लोगों ने एमेलिया का जोरदार स्वागत किया। तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति कूलिज उनसे वाइट हाउस में मिले।

वे रातों-रात स्टार बन गईं। उन्होंने ढेर सारे लेक्चर दिए और किताबें भी लिखीं। बैग्स, स्पोर्ट्स वियर बनाने वाली तमाम कंपनियों ने उन्हें अपना ब्रांड एंबेसडर (brand ambassador) बनाया।

कभी खुद कपड़े सिल कर पहनने वाली एमिलिया के नाम से क्लोदिंग लाइन शुरू की गई। उन्हें क्वीन ऑफ द एयर (Queen of the air) पुकारा जाने लगा।

अब उनके पास पैसा भी था। मशहूर पायलट चार्ल्स लिंडबर्ग के साथ मिल कर उन्होंने एयरलाइन (airline) भी शुरू की।

अब एमिलिया ने अकेले अटलांटिक पार करने की तैयारी की। 20 मई 1932 को अपने लॉकहीड वेगा 5 बी में वे टेलिग्राफ जर्नल लेकर चढ़ीं‌।

14 घंटे 56 मिनट की उड़ान में अटलांटिक के ऊपर बहने वाली तेज़ हवाओं ने उन्हें रास्ते से भटका दिया पर वे यूरोप पहुंच गई। अपनी मंज़िल पेरिस की जगह आयरलैंड के एक गांव में‌‌। लेकिन वे वह कारनामा कर चुकी थीं, जो इससे पहले किसी महिला ने नहीं किया था।

उन्हें दर्जनों सम्मान मिले। लेकिन एमिलिया की लंबी उड़ान बाकी थी। उन्होंने इक्वेटर के रास्ते दुनिया का चक्कर लगाने की ठानी।

लॉकहीड एयरक्राफ्ट कंपनी से इसके लिए एक खास प्लेन बनवाया। इसमें एक बड़ा-सा फ्यूल टैंक (fuel tank) था।

एमिलिया ने अपने साथ एक अनुभवी नैविगेटर फ्रेड नूनन को रखा। पहली बार में असफल रहने के बाद एमिलिया और नूनन दूसरी बार में न्यू गिनिआ पहुंचे।

Amelia Earhart का स्टाइल स्टेटमेंट भी अलग था।
Amelia Earhart का स्टाइल स्टेटमेंट भी अलग था।

यहां तक आने में तीन चौथाई रास्ता पूरा हो गया था। यहां से उन्हें 11,000 किलोमीटर प्रशांत महासागर पर उड़ान भरनी थी।

तय हुआ कि होनुलुलु (Honolulu) के रास्ते में हाउलैंड (howland) द्वीप पर उतर कर सप्लाई ली जाएगी।

हाउलैंड तक का रास्ता बताने के लिए वहां अमेरिकी कोस्ट गार्ड का एक जहाज़ खड़ा था। 2 जुलाई, 1937 को एमिलिया और नूनन न्यू गिनिआ से चले।

इस बीच दिक्कत हो गई। एमिलिया के भेजे रेडियो मैसेज कोस्ट गार्ड को तो मिल रहे थे, लेकिन कोस्ट गार्ड के एमिलिया को नहीं मिल रहे थे‌।

एमिलिया और नूनन पता नहीं लगा पा रहे थे कि हाउलैंड कहां है।  प्लेन का ईंधन खत्म होने लगा‌। एमिलिया और नूनन लापता थे।

आखिरी के एक घंटे बाद तक उनका कोई नामोनिशान नहीं मिला, तो उनकी तलाश की जाने लगी।

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यह अब तब का सबसे महंगा सर्च ऑपरेशन (search operation) था। उनका पता नहीं चल सका। 2 साल बाद 5 जनवरी, 1939 को उन्हें कानूनी तौर पर मृत घोषित कर दिया गया। उनकी मौत आज भी रहस्य है।

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