वीरभद्र महादेव मंदिर, जहां भगवान शिव ने की थी वीरभद्र की उत्पत्ति

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ऋषिकेश आए हैं तो गंगा तट पर स्थित प्राचीन वीरभद्र महादेव मंदिर (veerbhadra mahadev mandir) के भी दर्शन कर सकते हैं।  मंदिर शिवजी के भैरव स्वरूप का प्रतीक है।

यह मंदिर ऋषिकेश-हरिद्वार हाईवे (rishikesh-hardwar highway) से करीब दो किलोमीटर की दूरी पर पशुलोक (pashulok) में स्थित है।

स्कंदपुराण (skand puran) के केदारखंड (kedarkhand) में वर्णित कथा के अनुसार भगवान शिव (lord Shiva) ने दक्ष प्रजापति के यज्ञ को ध्वस्त करने के लिए अपनी जटा को पटक कर वीरभद्र की उत्पत्ति की थी।

बाद में भगवान शिव ने इसी स्थान पर वीरभद्र का क्रोध शांत किया था। और वीरभद्र ने ही यहां पर शिवलिंग की स्थापना की थी।

वीरभद्र महादेव मंदिर (veerbhadra mahadev mandir) के समीप ही रंभा नदी बहती है।

पुराणों के अनुसार देवी सती के यज्ञ में भस्म हो जाने के कारण आक्रोशित शिव के क्रोध को शांत करने के लिए भगवान इंद्र ने स्वर्गलोक की अप्सरा रंभा को यहां भेजा था‌।

भगवान शिव ने रंभा को भस्म कर दिया। बाद में उन्हीं के वरदान से उसे मुक्ति मिली और कालांतर में वह श्यामल रंग में नदी के रूप में बही।

आपको बता दें कि यह मंदिर जिस स्थान पर स्थित है, उसका पुरातत्व की दृष्टि से भी महत्व है। एनसी घोष ने वर्ष 1973-75 के मध्य यहां खुदाई कराई थी।

Veerbhadra mahadev mandir, जहां शिवरात्रि पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है।
Veerbhadra mahadev mandir, जहां शिवरात्रि पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है।

इस खुदाई से पता चला कि इस स्थान पर 100 ई. से लेकर 800 ई. के बीच मानव सभ्यता और संस्कृति विद्यमान थी।

खुदाई से प्राप्त वस्तुओं से पता चला कि वीरभद्र नामक नगर एक ऐतिहासिक और पौराणिक नगर था।

आज की तारीख में वीरभद्र का अलग छोटा सा रेलवे स्टेशन है, जहां से टिकट लेकर यात्री आवाजाही करते हैं।

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सावन के महीने के साथ ही महाशिवरात्री पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है। मध्य रात्रि से ही भगवान शिव को जलार्पण के लिए लंबी लाइन लग जाती हैं।

एक बड़ा मेला भरता है। सभी का अटूट विश्वास है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामना अवश्य पूरी होती है।

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