नागा संन्यासी करते हैं इन 17 वस्तुओं से श्रृंगार, आप भी जानिए ये कौन सी वस्तुएं हैं

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नागा संन्यासी (Naga sanyasi) बेशक निर्वस्त्र होकर रहते हैं, लेकिन श्रृंगार जरूर विशेष मौकों पर वे करते हैं। इसके लिए वे 17 चीजों का प्रयोग करते हैं।

आइए, अब आपको इन 17 चीजों के बारे में बताते हैं। इनमें शामिल हैं- लंगोट, चंदन, पैरों में कड़ा, अंगूठी, पंचकेश, कमर में फूलों की माला, माथे पर रोली का लेप, कुंडल, हाथों में चिमटा, डमरू, जटाएं, तिलक, काजल, हाथों में कड़ा, कमंडल, बदन पर भस्म का लेप और बाजुओं पर रूद्राक्ष।

हरिद्वार में महाकुंभ (mahakumbh) के दौरान ये नागा संन्यासी (Naga sanyasi) विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।

आपको बता दें कि महाकुंभ का पहला शाही स्नान (shahi snan) महाशिवरात्रि (mahashivratri) के दिन 11 मार्च, 2021 को होना तय है।

इस खास अवसर पर देशभर से आए लाखों नागा संन्यासी (Naga sanyasi) गंगा में डुबकी लगाएंगे। आपको बता दें कि इतनी बड़ी संख्या में नागा साधु शाही स्नान में ही एक साथ दिखाई देंगे।

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कुंभ के बाद सभी नागा संन्यासी (Naga sanyasi) गुप्त वास में रहने के लिए चले जाते हैं। ऐसे में उन्हें पूरे श्रृंगार में देखने का मौका कम ही मिलता है।

बगैर वस्त्र रहने के कारण ही इन्हें नागा संन्यासी कहा जाता है। आदि गुरु शंकराचार्य (adi guru shankaracharya) ने सनातन धर्म की स्थापना और रक्षा के लिए चार पीठ बनाई थीं।

ये चारों पीठ हमारे देश भारत के चार कोनों में आज भी चल रही हैं। ये पीठ हैं गोवर्धन पीठ, शारदा पीठ, द्वारिका पीठ और ज्योतिर्मठ पीठ।

इन पीठों के अंतर्गत 13 अखाड़े आते हैं। इन्हीं अखाड़ों में नागा संन्यासी रहते हैं। आपको बता दें कि नागा संन्यासी बनने की प्रक्रिया बेहद कठिन है।

Naga sanyasi हरिद्वार महाकुंभ में आकर्षण का केंद्र बने हैं।
Naga sanyasi हरिद्वार महाकुंभ में आकर्षण का केंद्र बने हैं।

इसके लिए उन्हें ब्रह्मचर्य की परीक्षा भी देनी पड़ती है। एक बार संन्यास लेने के बाद केवल एक ही समय भोजन करना होता है।

उसके लिए भी उन्हें सात घरों से भिक्षा मांगनी पड़ती है। नागा संन्यासी होना एक कठोर तप का पालन करना है।

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